5 Mukhi Original Nepali Rudraksh
अप्रमाणफलं हस्ते रुद्राक्षस्य तु धारणात् ।
उच्छिष्टो वापि कण्ठेन युक्तो वा सर्वपातकैः ॥
हरन्ति सर्वपापाश्च रुद्राक्ष स्पर्शनेन तु ।
रुद्राक्ष को धारण करने से अनगिनत फल हस्तगत होते हैं। कण्ठ चाहे उच्छिष्ट हो (झूठे बोल बोलने वाला) अथवा व्यक्ति समस्त पापों से युक्त क्यों न हो, रुद्राक्ष का स्पर्श करने से वह सभी पापों से छूट जाता है।
पञ्चवक्त्रः स्वयं रुद्रः कालाग्निर्नामतः प्रभुः । सर्वमुक्तिप्रदश्चैव सर्वकामफलप्रदः ॥ ६९
पाँच मुखवाला रुद्राक्ष साक्षात् कालाग्निरुद्ररूप है। वह सब कुछ करनेमें समर्थ, सबको मुक्ति देनेवाला तथा सम्पूर्ण मनोवांछित फल प्रदान करनेवाला है।
रुद्राक्ष कैसे धारण करें :- 1 दिन रुद्राक्ष को सरसों के तेल में भिगो कर रखें । दूसरे दिन गाय के दूध में भिगो कर रखें फिर अच्छी तरफ साफ करके रुद्राक्ष को "ॐ ह्रीं नमः" मंत्र से धारण करें ।